जन्मदिन पर लेखक लक्ष्मण सिंह त्यागी की 35वीं पुस्तक ‘विहान’ प्रकाशित, साहित्यिक सफर में जुड़ा नया अध्याय

पन्ना/धौलपुर। लेखक और शिक्षक लक्ष्मण सिंह त्यागी ‘रितेश’ के जन्मदिन के अवसर पर उनकी नई पुस्तक ‘विहान’ प्रकाशित हुई है। 5 अगस्त को अपने जन्मदिन के अवसर पर लक्ष्मण सिंह त्यागी ने अपनी नई पुस्तक ‘विहान’ के रूप में पाठकों को एक नई साहित्यिक कृति का उपहार दिया है। लेखक से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘विहान’ उनकी 35वीं पुस्तक है, जिसका प्रकाशन अगस्त 2026 में सामंत पब्लिशिंग द्वारा किया गया है।
लक्ष्मण सिंह त्यागी का जन्म 25 अगस्त 1986 को राजस्थान के धौलपुर जिले के बदरिका गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी विद्यालय में हुई। इसके बाद उन्होंने धौलपुर के राजकीय महाविद्यालय से बीए और एमए की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने बीएड करने के बाद ग्वालियर से एमएड की पढ़ाई भी पूरी की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने निजी विद्यालयों में शिक्षक के रूप में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की। 8 जुलाई 2013 को उनकी नियुक्ति मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में सरकारी शिक्षक के रूप में हुई।
वर्तमान में वे पन्ना स्थित शासकीय रुद्र प्रताप उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। अध्यापन उनके पेशेवर जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने साहित्य को भी अपनी रचनात्मक यात्रा का अभिन्न हिस्सा बनाया। सामंत पब्लिशिंग के लेखक परिचय के अनुसार, उनकी रचनाएं विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं और उनका लेखन कविता, कहानी, लघुकथा, लेख तथा अन्य साहित्यिक विधाओं तक फैला हुआ है।
त्यागी के लेखन में जीवन के सामान्य अनुभवों से लेकर सामाजिक और मानवीय विषयों तक की व्यापक झलक मिलती है। रिश्तों की संवेदनशीलता, संघर्ष के बीच उम्मीद, सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिक मूल्यों और व्यक्ति के व्यवहार जैसे विषय उनकी रचनात्मकता के केंद्र में दिखाई देते हैं। शिक्षक के रूप में बच्चों, परिवारों और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच रहने का अनुभव भी उनके लेखन को रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ता है। यही वजह है कि उनकी रचनाओं में कल्पना के साथ-साथ जीवन के अनुभवों की सहजता भी दिखाई देती है।
55 प्रेरणादायक लघुकथाओं से सजी है ‘विहान’
नई पुस्तक ‘विहान’ हिंदी भाषा में प्रकाशित 132 पृष्ठों की पेपरबैक पुस्तक है। सामंत पब्लिशिंग द्वारा अगस्त 2026 में प्रकाशित इस पुस्तक में 55 प्रेरणादायक लघुकथाओं को शामिल किया गया है। पुस्तक की कहानियां रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी परिस्थितियों और पात्रों के माध्यम से पाठकों को जीवन के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करती हैं।
‘विहान’ में परिवार, मित्रता, महत्वाकांक्षा, धन, सोशल मीडिया, नशे की प्रवृत्ति, जिम्मेदारी, संघर्ष, धैर्य, उदारता, विश्वास और आत्मविश्वास जैसे विषयों को लघुकथा के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इन कहानियों का उद्देश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से पाठकों को अपने व्यवहार, निर्णयों और उनके संभावित परिणामों पर विचार करने का अवसर भी मिलता है।
पुस्तक में बदलते सामाजिक परिवेश और आधुनिक जीवन की चुनौतियों को भी जगह दी गई है। सोशल मीडिया के प्रभाव से लेकर पारिवारिक रिश्तों की अहमियत तक, कई ऐसे विषय कहानियों का हिस्सा हैं जिनसे आज का पाठक सीधे जुड़ सकता है। आर्थिक सफलता और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के बीच संतुलन, माता-पिता और मार्गदर्शकों के प्रति सम्मान, कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना तथा जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील रहना जैसे संदेश भी अलग-अलग कहानियों के माध्यम से सामने आते हैं।
‘विहान’ नाम पुस्तक के लिए एक खास भावनात्मक जुड़ाव भी रखता है। विहान लेखक लक्ष्मण सिंह त्यागी के बेटे का नाम है, जिसे उन्होंने अपनी इस पुस्तक के शीर्षक के रूप में चुना है। साथ ही ‘विहान’ का अर्थ नई सुबह भी होता है, जो उम्मीद, सकारात्मकता और नई दिशा का प्रतीक माना जाता है। पुस्तक की प्रेरणादायक लघुकथाओं में भी संघर्ष के बीच उम्मीद, आत्मविश्वास और बेहतर जीवन की ओर बढ़ने का संदेश दिखाई देता है। इस तरह पुस्तक का शीर्षक लेखक के व्यक्तिगत जीवन से जुड़ाव के साथ-साथ इसकी विषयवस्तु के भाव को भी व्यक्त करता है। लघुकथाओं के साथ पुस्तक में चित्रों का प्रयोग किया गया है, जो कहानियों को पाठकों के लिए अधिक सहज और आकर्षक बनाने में मदद करता है।
शिक्षक की जिम्मेदारी के साथ साहित्य का निरंतर सृजन
लक्ष्मण सिंह त्यागी का साहित्यिक सफर इस मायने में भी उल्लेखनीय है कि उन्होंने अध्यापन जैसी जिम्मेदारी के साथ लेखन को लगातार आगे बढ़ाया। एक ओर वे विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ शैक्षणिक भूमिका निभा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर साहित्य के माध्यम से समाज और जीवन के अनुभवों को शब्द दे रहे हैं। उनकी 35वीं पुस्तक का प्रकाशन इस निरंतर लेखन यात्रा का प्रमाण है।
जन्मदिन के अवसर पर ‘विहान’ का पाठकों तक पहुंचना लेखक के लिए व्यक्तिगत रूप से भी खास अवसर है। यह पुस्तक केवल उनकी नई कृति के रूप में नहीं, बल्कि वर्षों से जारी उनके लेखन प्रयासों की निरंतरता के रूप में भी देखी जा सकती है। 55 लघुकथाओं के माध्यम से जीवन के अलग-अलग रंगों और परिस्थितियों को सामने रखने वाली यह पुस्तक पाठकों को मनोरंजन के साथ-साथ आत्मचिंतन का अवसर देने का प्रयास करती है।
‘विहान’ को सामंत पब्लिशिंग के अलावा Amazon, Flipkart सहित विभिन्न प्रमुख global e-commerce platforms पर भी उपलब्ध कराया गया है। इससे पुस्तक देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले पाठकों के साथ-साथ विदेशों में हिंदी साहित्य पढ़ने वाले पाठकों तक भी पहुंचेगी। लेखक की 35वीं पुस्तक के रूप में ‘विहान’ का प्रकाशन उनके जन्मदिन को एक साहित्यिक उपलब्धि से जोड़ता है और उनके निरंतर लेखन की यात्रा को एक नई पहचान देता है।







